मेरठ। एमडीए सचिव के निर्देश देने के दो दिन बाद भी मृत्युंजय अस्पताल की फाइल नहीं मिल रही है। इस मामले को देख रहे अधिकारी और कर्मचारी सचिव से फाइल न मिलने की बहानेबाजी कर रहे हैं। जबकि सरकारी जमीन पर बने इस अस्पताल की जांच डीएम ने एडीएम वित्त को सौंपी थी। इस प्रकरण का अमर उजाला ने खुलासा किया था। मामले में अभी तक कार्रवाई न होने से प्रशासन और एमडीए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
एमडीए उपाध्यक्ष राजेश कुमार पांडेय ने सचिव को नक्शे की जांच कर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। सचिव प्रवीणा अग्रवाल ने संबंधित अधिकारी से अस्पताल की फाइल तलब की थी, लेकिन अभी तक फाइल सचिव के कक्ष तक नहीं पहुंची है। एमडीए की तरफ से जेई और तहसील की टीम ने अस्पताल का निरीक्षण किया था, लेकिन यह जांच भी पूरी तरह से नहीं की गई। एमडीए जोनल अधिकारी विनीत कुमार ने अस्पताल का नक्शा पास होने का बयान दिया था। वहीं अस्पताल मालिक डॉ. शचींद्र शेखर ने एमडीए में शमन कराने के लिए आवेदन किया था। इस पर एमडीए ने अस्पताल में अवैध रूप से बने बेसमेंट को बंद करने की शर्त रखी थी, लेकिन उसे बंद नहीं किया गया।
वहीं, दूसरी तरफ जोनल अधिकारी विनीत कुमार का कहना है कि अस्पताल का नक्शा वर्ष-2007 में एक फ्लोर आवासीय और दो फ्लोर व्यवसायिक रूप से स्वीकृत किया गया है। वर्ष-2017 में एमडीए की तरफ से शमन किया गया था। इस दौरान बेसमेंट का ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने बताया कि प्रशासन की ओर से भी एमडीए को नक्शा पास करने के नजूल की जमीन पर एनओसी जारी की गई। अब इससे एमडीए का कोई वास्ता नहीं है।
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फाइल देखकर ही पूरे प्रकरण के बारे में बताया जा सकता है। अभी सिर्फ नक्शा सामने आया है। अस्पताल की फाइल न मिलने के बारे में संबंधित अधिकारी बता रहे हैं। - प्रवीणा अग्रवाल, सचिव, एमडीए
मृत्युंजय अस्पताल : अब तक नहीं मिली फाइल